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Fear Of Loss

Untruthfulness endures the reality, flawless blare brutality. You ignore and move on with authenticity. That’s the only actuality.
“Possibly the best therapy for the apprehension of loss is to reflect that life has a beginning as well as an end.”

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ख़्वाबो के ज़ायके

जिंदगी की तुकबंदी मे रोज ख्यालों का तड़का लगता है

कभी तीखा तो कभी मीठा ,जिंदगी का रोज स्वाद बदलता है |

ख्यालों के भी होते है , अलग अलग ज़ायके

कुछ सहर जाते है, कुछ बहक जाते है

पानी के बुलबुले से कुछ टूट जाते है |

कुछ बुनते है अपनी ही दास्तान

कुछ किसी की याद दिलाते है |

तन्हाई ,तकलीफ तजुरबे की रोज अंगीठी जलती है |

जिंदगी की रसोई मे रोज़ एक ख्वाइश पकती हैं |

रोज़ यह जिंदगी अपने स्वाद बदलती है

कभी तीखा , तो कभी मीठा पसंद करती है |

कभी गुलाबी तो कभी लाल रंग का ज़ायका जिंदगी मे भरती है

गजब है यह स्वाद ऐ ज़िंदगी दोस्तों

कभी उम्र भर तो कभी आधे रास्ते ही साथ छोड़ चलती है |

क्या नाम दे जिंदगी के इस स्वाद को रेत के चूले पर पक रही हे |

जिंदगी की रसोई , कब ढहाए जाएगी और पानी मे रेत की तरह बह जाएगी |

समेट कर जिंदगी की तुकबंदी को |

प्यार और विश्वास की गुटबंदी को

उमीदो की खुशबू को न बिखरने देना ,

जिंदगी की रसोई को शोलो मे न जलने देना |

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Hallucinations

Photo by Maksim Goncharenok on Pexels.com

I lived in the world of Illusions

This conferred my delusion

My vision takes me everywhere

There is no pain, no dare

I still exist in this world with the gist

There is no crap no fist

I may not laugh anymore

But that is not, forever for sure

I may not look very great

But that is not a concern to hate

I may not be meritorious

But that doesn’t say I’m not victorious

I live my life with hope & dreams

Even though my world is falling apart from the seams.

People may call me delirious

But I laugh to the fact and say, I am hilarious.

But their jibes will help me to rise to fame

Some people may laugh and make fun of me being lame

But deep down they know that they’re the ones to blame.

इतिहास का दर्पण

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वक़त अपना ही दर्पण दिखाता है |जीने का अंदाज बदल जाता है |
शून्ये मानसिकता की गवाही देता है इतिहास |
हमेशा ही चाहता है , न हो उसका परिहास|
इतिहास पर छपे सपनों को देख कर हम भी थोड़ा मुस्कारते है |
जनाब सपने तो सपने है , दूर खड़े ही इतराते है |
प्रतिबंद इस समाज मे, अभिव्यक्ति से हम कतराते है
सहजता को छोड़ मनोवैज्ञानिक हो जाते है |
कब क्या हुआ बस इसी गुथी को सुलझाते है |
इतिहास के पनो को हम बार बार दोहराते है |
पीछे मुड़ कर कितना भी देख लो सपने हाथ नहीं आते है |
रह जाते है एहसास तुम्हारे, तुम्हारा ही सवाल बन कर |
सपने कही खो जाते है , जिंदगी का घुमार बन कर
छोटे थे तो कहानिया सुना करते थे |
एक राजा था , एक रानी दोनों साथ जिया करते थे |
पर जनाब अब इतिहास बदल गया है | जीने का अंदाज बदल गया है |
अब तो न राजा है , न रानी और बहुत पुरनी सी लगने लगी है यह कहानी |
बड़े तो क्या अब बच्चे भी , एहसास से कतराते है|
इतिहास पर लिखे पनो को देख ही, हम मुस्कारते है |
पर जनाब सपने तो सपने है , एक दिन साथ छोड़ चले जाते है |

Training & Workshops

Content Writing Workshop

When – August 9th Sunday

Time :- @ 11:00 am

Venue:- Online via Skype

For Registration ,

Contact – Bharti @ 8527711382

email – Bharti.raina1@gmail.com

website:- bhartiraina76.wordpress.com

ACHEIVEMENTS

“Whenever you want to achieve something, keep your eyes open, concentrate and make sure you know exactly what it is you want. No one can hit their target with their eyes closed.” ―

Paulo Coelho, The Devil and Miss Prym

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